पर्यावरण हमारा


धरती को बचाओ
मनो खुद को बचाओ
कब तक रहेगा ऐसे
कोई कहर हो जैसे
यहाँ पेड़ कट रहे हैं
भू भाग बट रहे हैं
पशु , पक्षी रो रहे हैं
हम स्तब्ध सो रहे हैं
हर तरफ हैं धरती खाली
क्यों खो गयी हरियाली
हर खेत हो रहे बंजर
मनो प्रलय का मंजर
जो बढ़ रहा ये ताप हैं
इंसान का ही पाप हैं
इस धरा की ये पुकार हैं
मानव यहाँ क्यों बीमार हैं
सूखी पड़ी हैं डालियाँ
बह रही हैं गन्दी नालियाँ
अब सब भुला कर हमको
संकल्प करना होगा
जो छूटा उसको भी लेकर
हमें आगे बढ़ना होगा
आइये मिलकर अब हम
कुछ पेड़ लगाते हैं
धरती के प्रति अपना
कर्त्तव्य निभाते हैं
पावन यहाँ का जल हो
वन - वन यहाँ चहल हो
यह हैं अमोल धरोवर
आओ इसको बचाते हैं
हरियाली हो इसका आँचल
सिंचित हो कोना - कोना
स्वच्छता ही धन हो
बीमार कोई होना



पावना त्रिपाठी

Comments

Popular posts from this blog

Me No Pause Me Play ▶️ - Book Review

She Paints

Underneath